मुहीम कशिश…..

Missing / Found Children

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ये मुहीम मेरी,आपकी या हम में से किसी एक की तो हो ही नहीं सकतीं ये मुहीम हम सब की है।
ये मुहीम है एक मासूम बच्चे को घर तक लाने की।
अगर आज हम कशिश को वापस लाने में सफल होते हैं तो ऐसे लाखों लोगों के अंदर फिर से आशा जगेगी जो अपने बच्चों को वापस पाने की आशा खो चुकें है,उम्मीद खो चुके हैं।

में आप सभी से अपील करती हूँ आप सभी इस मुहीम से जुड़ें। फ़र्क़ नहीं पड़ता आप दिल्ली में रहते हो या कोलकाता मे या भारत के किसी भी अन्य शहर या गाँव में सवाल हम सब के बच्चों की सुरक्षा का है।

हम सब यह जानते हैं कि ये बच्चे हमारा आने वाला कल हैं।
अगर इनको सुरक्षा,स्वस्थ ओर सुरक्षित समाज नहीं देंगे इनका आज हम नहीं सँवारेंगे…….तो सोचिए हमारा आने वाला कल कैसा होगा।
आइये हम सब बच्चों के लिया एक सुरक्षित समाज का निर्माण करें।
हम कल भी कशिश और कशिश जैसे और बच्चो को वापस लाने के लिए कोशिश कर रहे थे और आगे भी करते रहेंगे।

आइये में से हम हो जाए इस मुहीम को सफल बनाए।

कुसुम भट्ट
Kashish RawatKashish Rawatकशिश रावत

पुलिस द्वारा जारी किया गया स्केच, “व्यक्ति जो कशिश के साथ देखा गया”
suspect

p2
Shipra Revera

p1

p6

Shipra Revera

Muheem Kashish

Missing / Found Children

Kashish Rawat

A four-year-old girl missing since May 12 from Noida Sector 22 has not been traced yet.

The family of the girl, Kashish Rawat, has put up posters across the city and police are using social networking sites and media tools to circulate the messageto trace her.
Sanjay Rawat, father of Kashish, said the child was playing in the local park in the evening. “She went to the park at around 5.50pm. Generally she used to return around 7pm but on that day she never returned,” said Rawat, who works as a marketing executive in a company in Sector 16.

He said the family searched for her at every posible place but she could not be found. “We finally registered a case at Sector 12-22 police post in the hope that police will trace her. More than a week has passed but we have not got any clue of her,” Rawat said. The family collected money to print coloured posters and put them up across the city in search of the missing child.
“We have put up over 2,000 posters on auto-rickshaws, commercial vehicles, trucks and every place possible in the city. We hope somebody calls us at the number given on the posters,” Sanjay said.